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गाजीपुर। औद्योगिक विकास के मामले में कभी पिछड़ा माने जाने वाला गाजीपुर जिला अब निवेश का उभरता हुआ केंद्र बनता जा रहा है। बीते चार वर्षों में जिले में कुल 483 करोड़ रुपये का निवेश हुआ, जबकि सिर्फ वर्ष 2025 में ही निवेश के प्रस्तावों ने नया रिकॉर्ड कायम कर दिया है। जिला उद्योग विभाग को इस वर्ष अब तक करीब 762 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं, जिससे हजारों लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।
प्रदेश सरकार की ओर से आयोजित यूपी इन्वेस्टर्स समिट के शुरुआती तीन चरणों (जीबीसी-1, 2 और 3) में गाजीपुर में निवेश की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रही। इन तीन वर्षों के दौरान जिले में कुल 154 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। इस निवेश से पांच औद्योगिक इकाइयों की स्थापना हुई और लगभग 939 लोगों को रोजगार मिला।
हालांकि चौथे वर्ष यानी जीबीसी-4 के दौरान जिले में निवेश ने रफ्तार पकड़ी। इस चरण में गाजीपुर को 329 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। इसके तहत 83 औद्योगिक इकाइयों की स्थापना का प्रस्ताव सामने आया, जिससे करीब 2723 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना जताई गई। वर्तमान स्थिति की बात करें तो इनमें से सात इकाइयों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। एक मामला बैंक में लंबित है, एक इकाई को भूमि न मिलने के कारण मामला न्यायालय में विचाराधीन है, एक में अनुबंध होना शेष है, जबकि दो इकाइयां निवेशकों के निजी कारणों से लंबित हैं।
वर्ष 2025 में जीबीसी-5 के तहत अब तक प्राप्त 762 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों से लगभग दो हजार लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। उद्योगों की स्थापना और निवेशकों की बढ़ती रुचि ने गाजीपुर को औद्योगिक नक्शे पर एक नई पहचान दिलाई है।
यूपी इन्वेस्टर्स समिट की शुरुआत के बाद से ही जिले को निवेशकों का लगातार समर्थन मिल रहा है। यह उपलब्धि न सिर्फ जिले की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ाएगी। गाजीपुर का यह बदलता औद्योगिक परिदृश्य आने वाले समय में जिले को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाने का संकेत दे रहा है।





